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राष्ट्रीय लोकदल ने युवा सांसदों की कमी पर चिंता व्यक्त की

लखनऊ - राष्ट्रीय लोकदल ने देश  के वर्तमान राजनैतिक हालात में लोकसभा में युवा सांसदों की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि भारत युवाओं का देश है जिसकी 65 प्रतिषत जनसंख्या की आयु 35 वर्ष से भी कम है लेकिन 2014 में गठित लोकसभा अब तक की सबसे बुजुर्ग लोकसभा है एक ओर देश युवा हो रहा है वहीं हमारी संसद में 25 से 45 साल के उम्र वालों सांसदों की संख्या नाम मात्र की है। राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे ने बताया कि नई दिल्ली में हुये युवा अधिकार सम्मेलन में कहा गया कि जब भारत में नगर निगम नगर पालिका ग्राम पंचायत और ग्राम सभा में चुनाव लडने की उम्र 21 वर्ष है तो विधान सभा और लोकसभा में 25 वर्ष की बाध्यता क्यों है। युवा होते देष को युवा सोच और युवा संसदों की जरूरत बताते हुये इस सम्मेलन में देश के वर्तमान हालात में नौजवानों को चुनाव लडने की उम्र सीमा 21 वर्ष करने की बात करने का प्रस्ताव लोक जनतांत्रिक जनता दल के अध्यक्ष शरद यादव, सीपीएम नेता सीताराम येचुरी, कांग्रेस नेता अहमद पटेल, एन सी पी नेता मजीद मेनन, राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयन्त  चौधरी, राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी, गुजरात के युवा नेता हार्दिक पटेल, ,आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह, पूर्व सांसद व वरिष्ठ पत्रकार शाहिद सिद्दीकी, टी एम सी नेता नाईमुल हक, सपा प्रवक्ता घनश्याम तिवारी, जे डी एस नेता दानिश अली, जे एन यू छात्र संघ अध्यक्ष एन साई बाला जी, पूर्व सासद मुंषीराम पाल, राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय सचिव गिरीष  चौधरी की उपस्थिति में पारित किया गया। 
श्री दुबे ने बताया कि इस सम्मेलन में पारित प्रस्ताव पर बोलते हुये राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत  चौrधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी जी अपने आप को देश का सबसे बड़ा यूथ आईकन बताते हैं. उनकी खुद की पार्टी में कितने युवाओं को मौका दिया गया है. उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं को युवा नेता की दरकार है। हम युवाओं को चुनाव लड़ने की उम्र सीमा को घटाने के लिए आगे आना होगा। अगर हमें देश की कठिन समस्याओं का हल निकालना है तो हम युवाओं को सत्ता में भागीदारी बढ़ानी होगी।
लोक जनतांत्रिक जनता दल के अध्यक्ष शरद यादव ने युवा शक्ति की ताकत पर जोर देते हुए कहा कि जवान आदमी ही चुनौतियों को स्वीकार करता है। वो जवानी किस काम की जो हर तरह के संकट के लिए तैयार न हो. उन्होंने देश की हालत पर चिंता जताते हुए कहा कि देश का हर तबका तबाह है। किसान संकट में है। देश की वर्तमान सरकार को संविधान से कोई मतलब नहीं है, इन्हें न हिंदू से मतलब है और न ही मुसलमानों से. ये सरकार केवल लोगों को बांटने का काम कर रही है. अगर देश को बचाना है तो बिना कोई जाति या मजहब देखकर वोट कर इस सरकार को उखाड़ फेंकना होगा। 
कार्यक्रम में गुजरात के युवा नेता हार्दिक पटेल ने आते ही कहा, ‘मैं मोदी जी के गुजरात से नहीं, सरदार पटेल और गांधी के गुजरात से आया हूं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए कहा, ‘विधानसभा चुनाव लड़ने की उम्र सीमा 25 साल होने से मैं चुनाव नहीं लड़ सका.चुनाव लड़ने की उम्र सीमा घटाई जानी चाहिए। हार्दिक पटेल ने कहा कि 1980 में बीजेपी दो सीट पर थी, आज भी दो ही सीट पर है ‘अमित शाह और नरेंद्र मोदी।
देश के वर्तमान हालात पर बोलते हुए कहा, देश में लोगों को धर्म के नाम पर बांटा जा रहा है. मैं पिछले दिनों राममंदिर निर्माण के पोस्टर देख रहा था जिसमें मैंने एक भी पोस्टर ऐसा नहीं देखा जहां अयोध्या का राजा राम सबरी के साथ बैठा हो। अंत में उन्होंने कहा कि आज के यूथ को मैं यही कहूंगा कि हमें मिलकर देश की समस्याओं को हल करना होगा। मैं आपको बता देना चाहता हूं कि नरेंद्र मोदी विकास पुरुष नहीं, विनाश पुरुष है.आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी सदन में चुनाव लड़ने की उम्र सीमा घटाने वाले विधेयक का पूर्ण समर्थन करेगी. वर्तमान समय में टीवी चैनलों पर केवल नफरत फैलाने का काम चल रहा है. इतिहास के गलत तथ्य प्रस्तुत किए जा रहे हैं.
वहीं कार्यक्रम में मौजूद गुजरात से राज्यसभा सांसद अहमद पटेल ने कहा, ‘सरकार चाहती है युवा कुछ न बोले, शांत रहे, लेकिन ये शांत नहीं रहेगा. हमारे देश का विद्यार्थी, युवा और किसान सब परेशान है लेकिन सरकार केवल मीटिंग, स्पीकिंग और एडवरटाइजिंग में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि युवा अधिकार सम्मेलन तभी सफल होगा ‘जब देश का युवा आगे आए और हम सब मिलकर प्रण लें कि वर्तमान सरकार को उखाड़ फेंकेगे।
श्री दुबे ने बताया कि सम्मेलन में कहा गया कि आस्ट्रेलिया, जर्मनी, कनाडा और डेनमार्क जैसे देशों में चुनाव लड़ने की उम्र 18 वर्ष है. वहीं ईरान में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की उम्र 21 साल और भारत में ये 35 साल है। जब 21 साल की उम्र में आप किसी गांव का प्रधान बन सकते हैं और पंचायती राज का पदाधिकारी बन सकते हैं लेकिन आप राज्य और देश की सदन में अपनी उपस्थिति नहीं दर्ज करा सकते हैं। 

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