लखनऊ - प्रदेश के युवाओं में बढ़ रही व्यापक नशाखोरी की प्रवृत्ति गहन चिन्ता का विषय है स्थिति इतनी विकट हो रही है कि 14 साल के बच्चों से लेकर 80 साल के बुजुर्ग तक इससे अछूते नहीं हैं। उत्तर प्रदेश के तमाम जिले स्मैक, गांजा, भांग, अफीम जैसे मादक पदार्थों की चपेट में हैं तथा इसकी लत से युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश हो या पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मादक पदार्थो के सप्लायरों की संख्या पूरे प्रदेश में फैलती जा रही है तथा नित नये युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं, प्रभावित शहरी क्षेत्रों के अतिरिक्त ग्रामीण इलाके उदाहरण के तौर पर अम्बेडकर नगर, आजमगढ़, जौनपुर, फैजाबाद, सुल्तानपुर आदि पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनपदों में स्मैक आदि की चपेट में आये युवाओं की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। इस खतरे के प्रति सरकार का ध्यान न देना निश्चित रूप से युवाओं के भविष्य के प्रति संवेदनहीनता दर्शाती है।
नशाखोरी की बढ़ती घटनाओं पर चिन्ता व्यक्त करते हुए उ0प्र0 काग्रेस कमेटी के प्रवक्ता डा0 उमा शंकर पाण्डेय ने बताया कि युवा किसी भी राष्ट्र व समाज की संभावना व भविष्य होते हैं, फैलता नशा रूपी यह जहर हमारे देश व प्रदेश की रगों-रगों में बैठता जा रहा है। जिन कन्धों पर देश का भविष्य निर्भर है उसे अपनी गिरफ्त में ले, हमारी भविष्य की संभावनाओं को मार रहा है। इन मादक पदार्थों की सप्लाई का व्यापक तंत्र प्रदेश के जनपदों में अपना जाल फैलाता प्रतीत होता है, ऐसे में शासन एवं प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि युवाओं को इस नशे के चक्रव्यूह से बचाने के लिए प्रदेश एवं समाज विरोधी ऐसे तत्वों की पहचान एवं उनके खिलाफ व्यापक कार्यवाही सुनिश्चित करने की व्यवस्था को दृढ़ बनाया जाये।
डा0 पाण्डेय ने कहा कि नशे के शिकार युवा विभिन्न अपराधिक घटनाओं की तरफ अग्रेसित होते हैं तथा स्वयं भी तमाम शारीरिक एवं मानसिक बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं। ऐसे युवाओं के परिवार भी आर्थिक एवं मानसिक तौर पर प्रभावित होते हैं। इसलिए सरकार को इस सामाजिक बुराई एवं अपराध के विरूद्ध तत्काल कठोर कदम उठाने के निर्देश जारी कर व्यापक कार्यवाही सुनिश्चित करवानी चाहिए।

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