Skip to main content

बीजेपी को स्वाइन फ्लू सपा-बसपा में उदासी

                                     अशोक सिंह विद्रोही /कर्मवीर त्रिपाठी की कलम से 
 लखनऊ - चुनावी मौसम में बीजेपी को स्वाइन फ्लू ने जकड़ लिया है, तो सीटों के बंटवारे की घोषणा के बावजूद सपा-बसपा में उदासी का दौर जारी है। सियासी दबाव के चलते सपा बसपा ने आनन-फानन में गठबंधन का ऐलान किया । बुआ- भतीजे के बीच बने इस रिश्ते को एक सप्ताह बीतने के बावजूद अभी तक सीटों की घोषणा नहीं हो सकी है। जिसकी वजह दोनों ही दलों के भीतर कुछ सीटों को लेकर मारामारी का होना है । सूबे की 80 में से तकरीबन 15 से 20 लोकसभा क्षेत्रों पर दोनों ही दल अपनी-अपनी दावेदारी कर रहे हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में जहां एक तरफ मुख्तार अंसारी ,अतीक अहमद, धनंजय सिंह समेत कयी सियासी दिग्गजों ने चुनावी परिक्रमा शुरू कर दी है तो वहीं पश्चिम यूपी में रालोद  को बंधन में शामिल करने को लेकर अभी तक असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी के चलते हाथीऔर साइकिल के सीटों का ऐलान नहीं हो पा रहा है।

 दिल्ली में भाजपा की केंद्रीय कार्यकारिणी के दौरान ही आनन-फानन में बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा मुखिया अखिलेश यादव ने पिछले 12 जनवरी को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन का ऐलान किया था। गठबंधन के आधार पर दोनों ही दलों के हिस्से में 38-38 सीटों के बंटवारे की बात कही गयी। बाकी बची 4 सीटों में से अमेठी और रायबरेली को कांग्रेस घराने के लिए छोड़ा गया। इस घोषणा के पीछे सपा बसपा की सोची समझी रणनीति भाजपा के केंद्रीय कार्यकारिणी पर प्रेशर पॉलिटिक्स बनाने मीडिया हाईप के चलते दोनों ही दल कहीं ना कहीं अपनी रणनीति में कामयाब होते भी दिखे। सीटों के बंटवारे में जल्दबाजी के चलते रालोद जैसे प्रमुख दल को भी मायूसी ही हाथ लगी। जबकि सपा बसपा पश्चिमी यूपी में रालोद के समीकरणों से बखूबी वाकिफ हैं। यही वजह रही कि रालोद नेता जयंत चौधरी ने लखनऊ से दूरी बनायी और सपा मुखिया अखिलेश यादव से दिल्ली में मुलाकात कर दिल के रिश्ते वाला बयान दिया।

 हाथी साइकिल गठबंधन के बुनियाद पर अगर नजर डाली जाए तो सीबीआई और ईडी के दबाव वाली कहानी से ज्यादा दम चाचा शिवपाल यादव के द्वारा सपा को दिए गए राजनीतिक डेन्ट और बीजेपी के आरक्षण कार्ड में नजर आता है । कभी मुस्लिम- यादव गठजोड़ से यूपी की सियासत में" माई "के समीकरण द्वारा सत्ता की विरासत चलाने वाले मुलायम सिंह यादव राजनीतिक हासिये पर चले गए हैं। मुलायम की राजनीति में शिवपाल सिंह यादव का अहम स्थान रहा है। जिसका जिक्र मुलायम और शिवपाल अक्सर करके भी रहते हैं ।तकनीकी तौर पर सपा में रहते हुए भी अपनी पार्टी बनाने वाले शिवपाल सिंह यादव ने जमीनी तौर पर सपा को अंदरूनी नुकसान पहुंचाया है।

 पार्टी के कई दिग्गज आज कल  चाचा शिवपाल के आंगन की शोभा बढ़ा रहे हैं। इसी के चलते चाह कर भी अखिलेश यादव चाचा शिवपाल को पार्टी से बाहर का रास्ता नहीं दिखा पाते पा रहे । कुछ ऐसे ही उलझनो में बसपा सुप्रीमो मायावती भी हैं। भाजपा द्वारा पहले यससी-एसटी एक्ट और फिर सवर्णों को 10  फ़ीसदी आरक्षण देने वाले तुरूप के इक्के ने बसपा के लिए दुश्वारियां खड़ी कर दी है। दलित- ब्राह्मण गठजोड़ के सफल प्रयोग के बूते बसपा ने प्रदेश में अपना जनाधार बढाया और साल 2007 में सत्ता भी हासिल की ।अब भाजपा के आरक्षण का अलाप के चलते हाथी को चिंता सताने लगी है। इन्हीं वजहों से सपा बसपा को एक दूसरे के सहारे की जरूरत पड़ी और गठबंधन का ऐलान हुआ।

 दोनों ही दलों के हिस्से में आयी 38-38 सीटों के खुलासे में यही से मुश्किलें भी पैदा हुयी। सूत्रों की मानें तो लोकसभा की 15 से 20 सीटों को लेकर दोनों ही दलों में पेंच फसा है। जिसकी वजह इन सीटों पर दोनों ही दलों की दावेदारी का होना है।

 बात अगर पूर्वी उत्तर प्रदेश की करें तो जौनपुर, गोंडा, बलरामपुर, बस्ती, इलाहाबाद, गाजीपुर जैसे सीटों पर सपा बसपा दोनों के ही प्रभावशाली नेता अपनी-अपनी  दावेदारी जता रहे हैं। इसी तरह बुंदेलखंड और पश्चिम यूपी के कुछ सीटों पर भी दोनों दलों में खींचतान जारी है। पश्चिम यूपी में गठबंधन रालोद को नजरअंदाज नहीं कर सकता। उप चुनाव के दौरान रालोद ने कैराना की सीट पर सपा बसपा के सहयोग से जीत दर्ज कराई थी। गठबंधन अगर रालोद को पश्चिम यूपी में सम्मानजनक सीटें नहीं देता है तो ऐसे में रालोद के सामने सभी विकल्प खुले होंगे । जिसका नुकसान बुआ भतीजे के ताजा रिश्तो को उठाना पड़ेगा। इन्हीं उलझनो के चलते माया -अखिलेश सीटों की घोषणा करने से बच रहे हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में मुख्तार घराना, अतीक अहमद, धनंजय सिंह, राजा कीर्तिवर्धन सिंह और रिजवान जहीर जैसे सियासी दिग्गज बसपा सपा के ही पाले से आते हैं ।इनकी सीटों को लेकर गठबंधन में पेच ज्यादा फसा है। स्थानीय स्तर पर चुनावों को प्रभावित करने में माहिर ये सियासी  दिग्गज  चुनावी ऊंट को किसी भी करवट बैठा सकते हैं। इसका अंदाजा सपा बसपा को बखूबी है।

Comments

Popular posts from this blog

स्थानांतरण 1-निरीक्षक श्री शैलेन्द्र कुमार सिंह जघन्य अपराध इकाई से प्रभारी निरीक्षक थाना गौतमपल्ली बनाये गये। 2-निरीक्षक श्री सुजीत कुमार दुबे प्रभारी मानवाधिकार प्रकोष्ठ से प्रभारी निरीक्षक थाना गोमतीनगर बनाये गये। 3-एस0आई0 श्री अजय प्रकाश त्रिपाठी थानाध्यक्ष गोमतीनगर से प्रभारी मानवाधिकार प्रकोष्ठ बनाये गये।

ब्रज यातायात एवं पर्यावरण जन जागरूकता समिति ने किया कृष्णा नगर पुलिस चौकी का नागरिक अभिनंदन

मथुरा - ब्रज यातायात एवं पर्यावरण जनजागरूकता समिति के द्वारा पुलिस चौकी कृष्णा नगर मथुरा का नागरिक अभिनंदन किया गया,कल दिनांक 19 एक 2019 को आगरा निवासी जो कि अपनी बेटी की शादी के लिए दहेज का सामान खरीदने के लिए बस के द्वारा मथुरा आ रहा था l मथुरा आते ही बस से उतर गया जब उसे व्यक्ति को अपने एक लाख 40 हजार नोटों से भरे थैले की याद आई तो उसे पता चलाकर उसका थैला बस में छूट गया है l बस मथुरा से निकल गई उसने अपने साथ हुई घटना चौकी कृष्णा नगर मथुरा को अवगत कराया चौकी इंचार्ज सुंदर सिंह कसाना ने अपनी तत्परता दिखाते हुए बस को जीएलए यूनिवर्सिटी के पास रोकते हुए उस बस में रखे हुए थैले को अपने कब्जे में लेते हुए बरामद किया और कृष्णा नगर चौकी में उस व्यक्ति नोटों से भरा थैला सम्मानजनक वापस लौट आया l इस सराहनीय कार्य के लिए । आज दिनांक 20 ,01,2019 को ब्रज यातायात एवं पर्यावरण जन जागरूकता की टीम ने मथुरा शहर कोतवाली क्षेत्र पुलिस चौकी कृष्णा नगर पहुंचकर चौकी इंचार्ज सुंदर सिंह कसाना के साथ योगेंद्र कुमार दिनेश भाटी पुष्पेंद्र सिंह विजेंद्र सिंह खूबी राम रामेश्वर पुलिस कर्मियों का प्रशस्ति पत्र क...