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नगर विकास मंत्री पर भारी वित्त सचिव का फरमान

लखनऊ - मुख्मंत्रीयोगी आदित्यनाथ के सुशासन और जीरो टॉलरेंस के  दावों पर शासन स्तर में बैठे अधिकारी ही पलीता लगाने का काम कर रहे हैं । ताजा मामला नगर विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले निकाय कर्मचारियों के मकान किराया एवं नगर  प्रतिकार  भत्ते  से जुड़ा है।                  
 जिस पर वित्त विभाग की सचिव पिछले 6 माह से सरकारी कलमकारी कर आपत्तियों का खेल रच रही हैं। स्थानीय  निकाय कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष शशि कुमार मिश्र ने इस विषय पर आगामी 31 जनवरी से प्रदेश भर में क्रमिक अनशन की चेतावनी भी दी है।
  केन्द्र सरकार द्वारा सातवें बेतनमान को लागू करने के बाद प्रदेश कर्मचारियों को मकान किराया और नगर प्रतिकर भत्ता जुलाई 2018 के शासनादेश के जरिए मिल रहा है। जबकि तकरीबन 60,000 से अधिक निकाय कर्मियों को 6 माह से ज्यादा गुजर जाने के बावजूद वित्त विभाग द्वारा लगाए गए आपत्तियों के पुलिन्दे के अलावा कुछ भी नहीं मिल सका है।
 निकाय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष शशि कुमार मिश्र का कहना है कि  सरकार के मंत्री परिषद द्वारा निकाय कर्मचारियों को भी उक्त  सुविधाएं देने का संकल्प एवं आदेश जारी हो चुका है । जिसके आधार पर राज्य कर्मचारियों को आवास किराया तथा नगर प्रतिकर भत्ता मिल रहा है। जबकि "अ" श्रेणी के अंतर्गत लेवल 5 के आधार पर आने वाले  नगर निकायों समेत प्रदेश के 60- 70 हजार कर्मचारियों को वित्त विभाग द्वारा लगातार आपत्तियां लगाकर फाइल वापस भेजने की वजह से हर महीने  रूपये 22980 का नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि इस तरह वित्त विभाग के हिला हवाली के चलते हजारों निकाय कर्मचारियों को करोड़ों रुपए का नुकसान अब तक हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस विषय की पूरी जानकारी विभागीय मंत्री सुरेश खन्ना को लिखित व मौखिक रूप से करा दी गई है । कर्मचारी हितों से वित्त विभाग द्वारा लगातार खिलवाड़ करने के कारण ही स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के बैनर तले आगामी 31 जनवरी से प्रदेश  भर में प्रदर्शन करने की योजना है।
 गौरतलब है कि निकाय कर्मचारियों के आवास किराये तथा नगर प्रतिकर भत्ता को लेकर 27 जुलाई 2018 को सचिव वित्त द्वारा सातवें वेतनमान की संस्तुतियों के आधार पर मकान किराया एवं नगर प्रतिकर भत्ता देने का संकल्प आदेश जारी किया गया था। प्रदेश सरकार द्वारा मकान किराया एवं नगर प्रतिकर भत्ता वेतन समिति की संस्तुतिओं को आधार बनाकर वित्त विभाग द्वारा संशोधित शासनादेश 18 जुलाई 2018 को जारी किया गया । जिसके आधार पर राज्य कर्मचारियों को 1 जुलाई 2018 से लाभ भी मिलने लगा।
 वित्त विभाग ने यहीं से निकाय कर्मचारियों के भक्ता लाभ के साथ आपत्तियों का खेल शुरू किया। विभाग ने 19 सितंबर 2018 , 7 दिसंबर 2018 तथा हाल में ही 12 जनवरी 2019 तक लगातार विभिन्न कमियों का हवाला देकर आपत्तियां लगाने में ही सरकारी कलम और कागज का उपयोग किया। हाल में ही 12 जनवरी 2019 को वित्त विभाग ने एक बार फिर आपत्ति लगाते हुए पत्रावली नगर विकास विभाग को वापस भेज दी । उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर 15 जनवरी 2019 को नगर विकास विभाग अनुभाग 1 को वित्त विभाग ने एक बार फिर फाइल वापस भेजते हुए आपत्ति लगाई कि नगर विकास विभाग अपने विभागीय मंत्री जी के माध्यम से मुख्यमंत्री से अनुमोदन प्राप्त कर उपरोक्त शासनादेश सचिव वित्त अलकनंदा दयाल द्वारा जारी आदेश 8 जनवरी 2019 के प्रतिबंधों के साथ तत्काल प्रभाव से अनुमन्य किया जाए।
 यह हाल तब है जब आने वाले महीने चुनावी माहौल से सराबोर होंगे । योगी सरकार फरवरी में ही आम बजट पेश करने की कवायद में जुटी है। ऐसे में वित्त विभाग की सचिव द्वारा निकाय कर्मचारियों के भत्ता सुविधाओं पर लगातार आपत्तियां से हजारों निकाय कर्मचारियों के विरोध का सामना योगी सरकार को करना पड़ सकता है। स्थानीय निकाय महासंघ के अध्यक्ष शशि मिश्रा ने विभागीय मंत्री सुरेश खन्ना को लिखे पत्र में भी कहा है कि प्रदेश निकाय के कर्मचारियों को मकान किराया एवं नगर प्रतिकर भत्ता के शासनादेश के तहत तय समय सीमा में भत्ता सुविधाएं मुहैया कराई जाए। जिससे हजारों निकाय कर्मचारियों का हित सुरक्षित हो सकें।

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