लखनऊ- जीवन में गुरु कृपा जरूरी है। गुरु की कृपा से ही भगवान का मिलन आसन होता है। यह बात श्री शिव श्याम मन्दिर समिति की ओर से हाता रामदास सदर कैंट में चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण कथा में शुक्रवार को कथा व्यास देवेश अवस्थी ‘‘द्वारिका नाथ जी महाराज’’ ने कही। उन्होंने कहा कि बिना गुरु के ज्ञान नही होता। इस लिए जगत को शिक्षा देने के लिए प्रभु विद्या अध्य्यन के लिए स्वयं भगवान संदीपनी गुरु के पास जा कर विद्या अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि बिना सेवा के प्राप्त की गयी विद्या सफल नही होती। गुरु आज्ञा का पालन करना सबसे बड़ी सेवा है। प्रसंग के दौरान महाराज जी ने एक भजन ‘‘मेरा तार प्रभु संग जोड़े ऐसा कोई सन्त मिले’’ सुनाया।
रुक्मिणी विवाह की चर्चा करते हुये कथा व्यास ने कहा कि प्रभु ने ब्रजजनो के पास सन्देश लेकर श्री उद्धव जी को भेजा। उद्धव जी ज्ञान प्रधान है और गोपांगनाये प्रेम प्रधान है। जीवन मे ज्ञान एवं प्रेम एक दूसरे के पूरक हैं। प्रेम से ज्ञान और ज्ञान से प्रेम दृढ़ होता है। इस लिए प्रभु से उद्धव जी एवं गोपिकाओं का मिलन ज्ञान एवं प्रेम का मिलन कराया। इस प्रसंग पर भजन ‘‘को जाने यह राह बिरह की’’ भजन सुनकर भक्तजन आनन्दित हुए। प्रभु जब द्वारिकाधीश बने तब पहले श्री बलराम जी का विवाह रेवती जी के साथ एवं प्रभु का प्रथम विवाह माता रुक्मिणी जी के साथ बड़ी ही धूमधाम से हुआ। विवाह गीत ‘‘कैसे सजे नंदलाल जोड़ी का जवाब नही’ और ‘‘किसने सजाया तुमको मोहन बड़ा प्यारा लगे’’ सुनाया तो कथा के मुख्य यजमान सुनील कुमार वैश्य, सीमा वैश्य व मन्दिर के राजेन्द्र कुमार पाण्डेय ‘गुरुजी’ समेत उपस्थित भक्तजन गदगद हो गए। प्रवक्ता सुधीश गर्ग ने बताया कि शनिवार को सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई जायेगी।

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