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अटल की शियासत विरासत का साक्षी रहा बलरामपुर

                                           अंबरीश तिवारी की कलम से 
बलरामपुर-  बलरामपुर वासियों का  पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल.बिहारी वाजपेयी के लिये एकतरफ़ा प्यार आज भी कम नही हुआ है। बलरामपुर ही.वह.लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र हुआ करता था जिसनें वाजपेयी को लोकसभा की चोखट पहली बार दिखाई थी ।उनके जीवन काल में ही परिसीमन मे बलरामपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र का अस्तित्व समाप्त हो गया क्योंकि अब नया क्षेत्र श्रावस्ती लोक सभा क्षेत्र बना दिया गया।                                  बताते हैं कि जब परिसीमन शुरू हुआ था तो उस समय केन्द्र में भाजपा सरकार थी । यह.भी कहा जाता है कि नाम परिवर्तन और नये क्षेत्रों को लेकर नया क्षेत्र बनाया जा रहा है लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने उस समय कोई आपत्ति ही नहीं दर्ज कराई । यदि आपत्ति दर्ज कराई गई होती तो बलरामपुर क्षेत्र ही बना रह जाता।बहरहाल अब लकीर पीटने का कोई फायदा नहीं। लेकिन अब अनेक सामाजिक संगठनों व बुद्धि जीवियों मे वाजपेयी जी की याद में उनके जन्मदिवस के अवसर पर एकबार फिर बलरामपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र का नाम बहाल करने की मांग जोर शोर से उठाया है। जहाँ यह तर्क दिया जाता है कि वाजपेयी को जब लखनऊ व एक दूसरे क्षेत्र ने उन्हें लोकसभा में भेजने से इंकार कर दिया तो 1957मे पहली बार लोकसभा मे उन्हें भेजा था। वहीं. दूसरा तर्क यह भी दिया जाता है कि वाजपेयी जी पर यदि भविष्य की पीढियां तलाश करना चाहेंगी तो पता नहीं पा सकेंगी कि वह किस बलरामपुर से चुनाव लड कर पहली बार लोकसभा पहुंचे थे।वैसे जानकारों का कहना है कि सरकार के हाथ मे लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का नाम बदलना नही होता । वैसे वाजपेयी के जन्म दिवस पर लोगों ने तमाम उम्मीद लगा.रखी थीं।जिसमें खास तौर पर मेडिकल कालेज का श्री वाजपेयी के नाम का उदघाटन भी शामिल था वह भी टांय टांय फगस हो गया।
                   ठेठ बलरामपुरी मे कहें तो रोवत रहेन पूतेक होय गा भतारेक

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