Skip to main content

योगी सरकार पर स्टिंग का दाग-दाग अच्छे नहीं

              योगी जी के राज में सेटिंग्स -गेटिंग का स्टिंग
                                 ( फ़ाइल फ़ोटो )
अशोक सिंह विद्रोही /कर्मवीर त्रिपाठी
उत्तर प्रदेश -चुनावी मौसम शुरू होते ही योगी सरकार पर सहयोगी दलों के आरोपों की बौछार के साथ ही तीन मंत्रियों के निजी सचिवों के कारनामे से पैदा हुए संकट के बादल छा  गए हैं। द्वितीय अनुपूरक बजट सत्र के दौरान विधान परिषद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों पर झोला लेकर धन उगाही करने का आरोप लगाया था। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस और गंगा की तरह पवित्र होने का दावा महज एक हफ्ते में ही फुस्स साबित हो गया है। हालांकि मुख्यमंत्री योगी ने तीनों निजी सचिवों को निलंबित कर एसआईटी जांच के साथ जीरो टलरेंस का राग एक बार फिर अलापा है। सरकार के लगभग 20 महीनों के कार्यकाल के दौरान  एक दर्जन से अधिक मामलों के एसआईटी जांच के आदेश दिए गए। जिनके बारे में आज तक कोई भी जानकारी फाइलों से निकल कर कार्रवाई के अंजाम तक नहीं पहुंच सकी। जिसे लेकर  सियासी गलियारों में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व क्षमता पर प्रश्नचिन्ह लगना शुरू हो गया है।
 प्रदेश में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सत्ता में आयी बीजेपी सरकार के लिए 2018 साल का आखिरी महीना शुभ साबित नहीं हो रहा है। शिक्षक भर्ती, कृषि विभाग के मिट्टी परीक्षण तथा कृषि यंत्र में हुए घोटाले से सरकार अभी उबर भी नहीं पाई थी कि उसके तीन मंत्रियों के निजी सचिवों संतोष अवस्थी, ओमप्रकाश कश्यप और एसपी त्रिपाठी पर एक निजी चैनल ने स्टिंग कर  ठेके - पट्टे दिलाने के नाम पर पैसे मांगने का खुलासा कर दिया। संगठन और शुचिता का दम भरने वाली भाजपा तथा योगी आदित्यनाथ के लिए यह स्टिंग ऑपरेशन बड़ी परेशानी पैदा करने वाला साबित हो सकता है। वह भी तब जब चंद महीनों में आम चुनाव 2019 होने वाले हैं।
 सूत्रों की मानें तो केंद्रीय नेतृत्व को मंत्रियों के कार्यालय में चल रहे डीलिंग गेम की भनक अरसे से थी। जिसको लेकर नेतृत्व ने फॉर्मूला निकालते हुए प्रत्येक मंत्री के साथ संगठन का एक व्यक्ति लगाने का काम भी शुरू किया था। हालांकि मंत्रियों तथा संगठन में आपसी खींचतान भी इस मुद्दे पर खूब मची थी। कुछ दिनों तक सख्ती के चलते योगी सरकार के अधिकांश मंत्री सन्नाटे में रहे। सेटिंग - गेटिंग के मामले में दशकों से कुशल प्रबंधक रहे सचिवालय निजी सचिव कर्मियों ने लगभग हर सरकार में मलाई खाने और खिलाने का इंतजाम किया है। 
संगठन स्तर पर मंत्रियों के साथ तैनात किए गए कार्यकर्ता इन निजी सचिव समेत सचिवालय स्टाफ के पर गिनने में अनाड़ी साबित हुए जिसका परिणाम अब स्टिंग ऑपरेशन के रूप में संगठन और योगी के सामने हैं। बीस महीनों की सरकार में बनारस पुल हादसा, विवेक तिवारी हत्याकांड, शिक्षा मित्र, पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती समेत दर्जनों मामलों में योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी जांच टीम  के गठन का फरमान सुनाया। कलम के कलाकार अफसरशाही ने योगी के तमाम जांच रिपोर्टो को घुमाने फिराने में महारत के चलते सरकार के वादों और इरादों पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है । जिसे लेकर सत्ता पक्ष सहित सहयोगी दलों तक में भीतर खाने सुगबुगाहट तेज हो गई है । सूबे में लगातार बदतर हो रहे कानून व्यवस्था और अफसरशाही पर योगी आदित्यनाथ की ढीली पड़ती पकड़ की चर्चाऐ अनुपूरक बजट सत्र के दौरान विधायकों के बीच  बीआईपी कैंटीन में ही सुनायी पड़ने लगी थी। योगी मंत्रिमंडल के मंत्रियों की मनमानी और बेलगाम अफसरों की नाफरमानी का ज्वार बीजेपी विधायकों के भीतर उठने लगा है । जिसकी प्रतिक्रिया आगामी चुनावों में बीजेपी नेतृत्व को देखने को मिल सकती है।
 सियासी पंडितों की मानें तो सचिवालय निजी सचिव संघ आईएएस लाॅबी से भी ज्यादा ताकतवर संगठन है। जिसका दबाव व प्रभाव हर आती - जाती सरकारों पर रहता है । ऐसे में भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस को लेकर स्टिंग ऑपरेशन पर दिए गए योगी आदित्यनाथ के फरमान पर होने वाली कार्रवाई पर सबकी निगाहें होंगी।
 क्या कहा है मुख्यमंत्री ने अपने आदेश में
योगी सरकार के तीन मंत्रियों के निजी सचिवों को निलंबित कर दिया गया है। आरोपी सचिवालय कर्मी तबादले, ठेका-पट्टा दिलाने के लिए डीलिंग करते हुए एक निजी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में पकड़े गए थे। इनमें पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर, खनन राज्यमंत्री अर्चना पांडेय और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पौत्र बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह के निजी सचिव शामिल हैं। सीएम ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए कर्मियों पर एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है। साथ ही एसआईटी का गठन कर दस दिन के भीतर  रिपोर्ट मांगी है।
योगी ने दिए जाॅच के आदेश एसआईटी गठीत
                   एडीजी लखनऊ जोन राजीव कृष्ण होंगे एसआईटी के अध्यक्ष
 अपर मुख्य सचिव सचिवालय प्रशासन महेश चंद गुप्ता ने सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर तीनों सचिवों को निलंबित कर दिया  है। इन पर जल्द ही  एफआईआर भी होगी। इसके अलावा सीएम ने पूरे मामले में एसआईटी के गठन के निर्देश भी दिए हैं। एडीजी लखनऊ जोन राजीव कृष्ण को एसआईटी का अध्यक्ष बनाया गया है। आईजी एसटीएफ एवं सतर्कता अधिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारी इसके सदस्य होंगे। विशेष सचिव आईटी राकेश वर्मा एसआईटी की जांच में सहयोग करेंगे। सीएम ने दस दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने ऐसे प्रकरणों की समीक्षा करने का निर्देश भी दिया  है।

Comments

Popular posts from this blog

स्थानांतरण 1-निरीक्षक श्री शैलेन्द्र कुमार सिंह जघन्य अपराध इकाई से प्रभारी निरीक्षक थाना गौतमपल्ली बनाये गये। 2-निरीक्षक श्री सुजीत कुमार दुबे प्रभारी मानवाधिकार प्रकोष्ठ से प्रभारी निरीक्षक थाना गोमतीनगर बनाये गये। 3-एस0आई0 श्री अजय प्रकाश त्रिपाठी थानाध्यक्ष गोमतीनगर से प्रभारी मानवाधिकार प्रकोष्ठ बनाये गये।

ब्रज यातायात एवं पर्यावरण जन जागरूकता समिति ने किया कृष्णा नगर पुलिस चौकी का नागरिक अभिनंदन

मथुरा - ब्रज यातायात एवं पर्यावरण जनजागरूकता समिति के द्वारा पुलिस चौकी कृष्णा नगर मथुरा का नागरिक अभिनंदन किया गया,कल दिनांक 19 एक 2019 को आगरा निवासी जो कि अपनी बेटी की शादी के लिए दहेज का सामान खरीदने के लिए बस के द्वारा मथुरा आ रहा था l मथुरा आते ही बस से उतर गया जब उसे व्यक्ति को अपने एक लाख 40 हजार नोटों से भरे थैले की याद आई तो उसे पता चलाकर उसका थैला बस में छूट गया है l बस मथुरा से निकल गई उसने अपने साथ हुई घटना चौकी कृष्णा नगर मथुरा को अवगत कराया चौकी इंचार्ज सुंदर सिंह कसाना ने अपनी तत्परता दिखाते हुए बस को जीएलए यूनिवर्सिटी के पास रोकते हुए उस बस में रखे हुए थैले को अपने कब्जे में लेते हुए बरामद किया और कृष्णा नगर चौकी में उस व्यक्ति नोटों से भरा थैला सम्मानजनक वापस लौट आया l इस सराहनीय कार्य के लिए । आज दिनांक 20 ,01,2019 को ब्रज यातायात एवं पर्यावरण जन जागरूकता की टीम ने मथुरा शहर कोतवाली क्षेत्र पुलिस चौकी कृष्णा नगर पहुंचकर चौकी इंचार्ज सुंदर सिंह कसाना के साथ योगेंद्र कुमार दिनेश भाटी पुष्पेंद्र सिंह विजेंद्र सिंह खूबी राम रामेश्वर पुलिस कर्मियों का प्रशस्ति पत्र क...