लखनऊ- भारत के राजनैतिक इतिहास के लिए 16 फरवरी कभी न भूलने वाला दिन साबित होगा। आज हमने पूर्व प्रधानमंत्री श्रेद्य अटल बिहारी वाजपेयी के रूप में एक ‘‘रत्न’’ खो दिया। इस ‘‘ रत्न’’ की भरपाई कभी नही हो सकती। यह बाॅत आज राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी ने राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद द्वारा आयोजित शोक सभा में कही। परिषद के नेता हरिकिशोर तिवारी ने कहा कि भारत की राजनीति में मूल्यों और आदर्शों को प्राथमिकता देने वाले, स्वतंत्र भारत के ढांचागत विकास के दूरदृष्टा, भारतीय राजनीति के शलाका पुरुष पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्वेय अटल बिहारी वाजपेयी जी का निधन भारत की राजनीति के महायुग का अंत है। अटल बिहारी वाजपेयी के लिए राष्ट्रहित सर्वोपरि था। राष्ट्र के प्रति श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की सेवाओं के दृष्टिगत उन्हें देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ प्रदान किया गया था। अटल जी ने डाॅ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पं0 दीनदयाल उपाध्याय के मार्गदर्शन में राष्ट्र-सेवा के संस्कार ग्रहण किए थे। अटल जी के व्यक्तित्व को बहुआयामी और प्रेरक बताते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वे लोकप्रिय और सर्वमान्य नेता थे, जिनका सभी सम्मान करते थे। भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में अटल जी जैसा विराट व्यक्तित्व मिलना कठिन है। उनका 6 दशक का निष्कलंक राजनैतिक जीवन हमेशा याद किया जाएगा। अटल जी ने राजनीति को मूल्यों और सिद्धान्तों से जोड़कर देश में सुशासन की आधारशिला रखी थी। उनकी एक ओजस्वी वक्ता और प्रखर सांसद के रूप में अटल जी की विशिष्ट पहचान थी। भारतीय संसद की गौरवशाली परम्पराओं को समृद्ध करने के लिए अटल जी को सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार भी प्रदान किया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर आयोजित शोक सभा में प्रान्तीय अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी, संरक्षक भूपेश अवस्थी, महामंत्री शिवबरन सिंह यादव, अनिल पाठक, लल्लू तिवारी, बनी सिंह चैहान, गिराजा कान्त, मस्तराम वर्मा, राकेश श्रीवास्तव, रूपेश कुमार श्रीवास्तव, शशिकान्त श्रीवास्तव, अनुज शुक्ला, सन्तोष तिवारी, चन्द्रकेश यादव, अमित शुक्ला, सुरेश पाण्डेय, अम्बिका प्रसाद दुबे, अशोक पाण्डेय, विजय प्रताप पाल, राम भजन यादव, तौलू प्रसाद, रामश्रेय यादव, मनोकनिका उपध्याय, राजेश मोहन मिश्रा, नरेन्द्र सिंह, प्रभात मिश्रा, शोभा शर्मा, बी.एस. डोलिया, धमेन्द्र सिंह, अमिता त्रिपाठी, अशोक कुमार दुबे, सुभाष चन्द्र तिवारी, अविनाश चन्द्र श्रीवास्तव, अमरजीत मिश्रा, राम सुरेश सिंह, अशोक सिंह आदि ने शोक श्रंद्धाजलि अर्पित की।
पेश हैं माई नेशन टीम की ख़ास रिपोर्ट अशोक सिंह विद्रोही /कर्मवीर त्रिपाठी/ सुधीर वर्मा की कलम से उत्तर प्रदेश - यह लोकतंत्र है साहब यहाॅ मुर्दे जिन्दा हैं।ये डिजिटल इंडिया के जिंदा मुर्दे अपने जैसे मुर्दो से ही नहीं अपितु देश के गृह मन्त्री प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भी समय - समय पर मिलते रहे हैं ।यह तथ्यहीन नहीं कह रहा हूं प्रमाण हैं। इस लोकतंत्र में आप और हम कब तक जीवित रहेगें? इसका लेखा-जोखा यमराज व महाकाल के इतर सरकार के राजस्व विभाग के पास ही है। राजस्व विभाग की असीम कृपा से देश भर में हजारों की संख्या में जीवित मुर्दे हो गये हैं। कहने का मतलब है कि इस लोकतंत्र में जीवित मुर्दो की तादात में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गयी है ।जिसके चलते इसी विभाग की कृपा से वर्षो पूर्व एक संगठन "मृतक संघ " खड़ा हुआ है। इसी मृतक संघ के अध्यक्ष मृतक लाल बिहारी हैं। मृतक ...

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