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साहब छुट्टी दे दो घर जाना है -सिपाही

                         यह घटना काल्पनिक है 

          परन्तु इसका सम्बन्ध पुलिस के हर एक सिपाही से

सिपाही की छुट्टी- थाने के कार्यालय में पिछले  एक महीने से पड़ी छुट्टी को देख कर सिपाही ने थाने के मुंशी से बोला दीवानजी मेरी  छुट्टी कब होगी 2 महीने से घर नही गया हूं।  मुंशी ने  नाँक पर रखे चश्मे की बीच से झांकते हुए कहा क्यो तुम चले जाओगे तो डियूटी कौन करेगा पहले ही थाने में सिपाहियों की कमी है ,,औऱ तुम्हे छुट्टी चाहये  फिर चले जाना। 

 कब जाऊंगा सरजी,? 
पिछले एक महीने से मां बुला रही है, कि घर कब आयगा" सिपाही ने झुंझलाते हुए कहा  मुंशी ने धमकाते हुए कहा  ज्यादा बहश मत करो , दो लाइन जीडी में लिख दूँगा तो जबाब  नही दे पाओगे 

सिपाही गुस्से का घूंट पीता है और छुट्टी की एप्लिकेशन उठाकर चला जाता  है। 
अगले दिन सुबह, हाथ मे छुट्टी की एप्लिकेशन लिए सीओ साहब के दफ्तर के बाहर खड़ा होता है, और पेशी के मुंशी से पेश करने के लिए आग्रह करता है, " सर मां बहुत बीमार है, घर जाना जरूरी है, साहब के सामने छुट्टी के लिए पेश करा दो सर", पेशी मुंशी ने कहा ," अरे तुम सुबह सुबह छुट्टी के लिए आ गये, देख कर साहब और नाराज होंगे, 2 घंटे बाद आना सिपाही  चला  जाता है और 2 घंटे बाद आता है और फिर से पेश होने के लिए आग्रह करता है, पेशी मुंशी कहता है अभी साहब का मूंड ठीक नही है अभी खड़े रहो थोड़ी देर एक घंटे खड़े होने के बाद, सिपाही ने एप्लिकेशन के नीचे  सौ  की दो पत्ती लगाकर पेशी मुंशी के आगे बढ़ाते हुए कहता है अब तो देख लो साहब   मुंशी मुस्कुराते हुए कहता  ठीक है देखता हूं बेसे साहब का मूंड अभी भी ठीक नही है आधा घंटा और खड़े होने के बाद मुंशी आवाज लगता है आजाओ साहब बुला रहे हैं    
       टोपी, वेल्ट ठीक कर सिपाही सीओ साहब के सामने थम बनाता है, सीओ साहब पूछते हैं तुम्हारी माँ की तबियत खराब है इलाज के कागज कहाँ है और 10 दिन की छुट्टी का क्या करोगे दवाई दिलाकर 2 दिन में वापस अजाना, कौनसा तुम डॉक्टर हो साहब 2,3 महीने हो गए घर गए हुए ! साहब कम से कम 7 दिन की तो कर दीजिय छुट्टी सिपाही ने गिड़गिड़ाते हुए कहा  सीओ साहब ने डांटते हुए कहा 3 दिन की लेजाओ  इससे ज्यादा नही करूँगा सीओ ने 10 में से 3 दिन की छट्टी कर सिपाही की तरफ फेंकी सिपाही 3 दिन की छुट्टी पर भी खुश होते हुए बाहर आकर अपने घर पर फोन कर बताने लगा, कि तभी सीओ ने उसे खुश होते देख अपने पेशी मुंशी से कहा इसकी तो मां बीमार थी,ओर यह खुश हो रहा है, लगता है झूट बोल रहा है, बुलाओ उसे मुंशी ने चिल्लाते हुए सिपाही से कहा  झूट बोलकर छुट्टी लेते हो ,  चलो साहब बुला रहे है सिपाही डरते हुए सीओ के सामने गया, सीओ ने डांटते हुए कहा तुम्हारी तो मां बीमार थी और तुम बाहर खड़े हो कर हंस रहे हो अपनी मां से बात कराओ  पेशी मुंशी ने सिपाही से उसकी मां का नम्बर मिलाकर साहब को मोबाइल पकड़ा दिया,मोबाइल रिसीव होने पर सीओ ने पूछा आप सिपाही की मां बोल रही हो  उधर से आवाज आई  हां आप बीमार हो नहीं तो इतना सुनते ही सीओ ने फोन काट दिया, भोली भली मां, पुलिस की बेबसी को नही समझ पाई, जबाब नहीं में सुनकर सीओ ने सिपाही को हजार तरह की गलियां सुनाते हुए अनुशासन हीनता और अफसर को गुमराह करने के जुर्म में ओ0आर0 का आदेश दिया और छुट्टी भी कैंसिल कर दी ओ0 आर0 बाले दिन सिपाही एसपी के सामने पेश किया गया,और जुर्म की सजा देकर सिपाही से सफाई  देने के लिए कहा सिपाही ने अपने जबाब में कहा  साहब दो महीने से छट्टी की एप्लिकेशन लगा रखी थी,घर गए हुए  महीनों हो गए थे।  
     साहब पुलिस में जबतक किसी की मां-बाप बीमार नहीं होते या मर नही जाते, छट्टी इतनी आसानी से कहाँ मिलती है, साहब कौन अपनी मां को बीमार करना चाहता ,मजबूरी में ये सब करना पड़ता है, वरना सिर्फ घर जाने हेतु छट्टी कहाँ मिलती हैं! सिपाही की आंखे नम थी और सब खामोश थे सिपाही को दुःख सजा का नही था उससे बड़ी सजा उसके लिए यही थी कि उसकी छट्टी एक बार फिर नही हो सकी और उसकी मां का उससे मिलने का इंतज़ार अभी तक खत्म नहीं हुआ है।  




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