MY NATION NEWS - शाही सौख शाही भोज व शाही दर्द का यूपी की सियासत से क्या हैं वास्ता आइये जानते हैं-अशोक सिंह / करमवीर त्रिपाठी
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी दो लोकसभा के उपचुनाव हारने के बाद उन्नाव घटना के दरमियान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का राजधानी में कुछ घंटों का एक प्रवास होता हैं जो अमेठी से वापसी में 5केडी तक सिमट जाता हैं कुछ दिनो के भीतर ही बीजेपी के चाणक्य फ़िर राजधानी में दस्तक देते हैं और भाजपा दफ्तर और राजभर. शर्मा और मौर्य के साथ सत्ता संतुलन का पाठ पढ़ते पढ़ाते हैं... जाते जाते तक़रीबन 20 मिनट में योगी से अलग राज योग पर चर्चा कर पीएम मोदी के ग्राम स्वराज अभियान का पताका थमा कर लुटियन्स जोन में वापसी करते हैं.
मोदी के इस अभियान ( 5 मई तक ) की टाईमिंग ख़ास मायने रखता हैं. न ये किसी कार्यक्रम कैलेण्डर का हिस्सा हैं न मोदी के मन की बात का.आखिर फ़िर क्यों आनन फानन में इसकी ज़रूरत बीजेपी को आन पड़ी.
बात दिलचस्प हैं अगर थोड़ा पीछे के घटना क्रम पर गौर किया जाये तो दो उपचुनाव में हार और आगामी कर्नाटक चुनाव में कहीँ न कहीँ एक समानता मिलेंगी. दलित फैक्टर. जी हाँ कर्नाटक में लींगाय्त सम्प्रदाय 18% अपने को हिंदू नहीँ मानता सरकार ने बाकयदा उन्हे कोटा दे रखा हैं.
मोदी और शाह की चिंता साल 2019 हैं न कि कुछ और.
बैर हाल बात यूपी के शाही अंदाज़ की हो रही हैं.. तो योगी आदित्यनाथ अमरोहा के ग्राम मेहदीपुर स्वराज सम्मेलन में गये वहाँ उन्होंने तक़रीबन 3727 लाख रुपए की लागत की विकास योजनाओं का लोकार्पण किया. जिस गाँव के ग्राम प्रधान प्रियंका देवी के घर अपने सरकारी लाव लश्कर के साथ रात्रि विश्राम के ठीक पहले भोजन करने गये आइये आपको वहाँ के हकीकत से रूबरू कराते हैं.. न मोबाईल न कैमरा दिन में ही नये चमचमाते बरतन पीने के लिये बीस्लरी की बोतलों का जखीरा.ये तमाम इँतिजाम अफसरों की सर परस्ती में दिन में ही कर लिये गये. आखिर ये शाही इँतिजाम हो भी कैसे न जब सूबे के मुखिया योगी का शाही आगमन हो रहा हो. सड़को को नई नवेली दुल्हन के गालों में मेकप की तरह चमकाया गया. जिस स्कूल में सीएम को रात बितानी थी वहाँ दिन में ही बिजली जला दी गई. हमेशा न सही लेकिन शाही तामझाम के लिये स्कूल के सिंटेक्स में बाल्टी से पानी भर कर इंतजाम को अंजाम दिया गया. अब इस सब से कितना और कितने दिनों में या दिनों तक विकास रहेगा दिखेगा ये तो नहीँ कहा जा सकता लेकिन शाही अंदाज़ ज़रूर समझ में आया.....
👉👉 चलते-चलते-----
बात बहुत मामूली सी हैं लेकिन परेशान कर देने वाली हैं इस से सरोकार किसी न किसी का कभी कभी पड़ता रहता हैं...
आखिर क्यों बहादुर खाकी 10में से 7 मामलों में देसी कट्टा खोखे बरामद दिखा कर आर्म्स एक्ट में जेल भेज देती हैं.... बताइयेगा ज़रूर कट्टा तंत्र का क्या हैं राज...- - - कहाॅ है यह कट्टा तमन्चा फैक्टरी कहां -कहां स्थापित है? सरकार की खुफिया एजेंसी इन उत्पादित केन्द्रो तक क्यों नहीं पहुचतीं हैं

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