MY NATION NEWS-धरना स्थल बहाली के लिए एकजुट होकर संघर्ष का आहवान जब पास से नही सुनती सरकार तो दूर से क्या सुनेगीः सुरेश सिंह यादव
लखनऊ,27 अप्रैल,2018। जब चंद कदमों की आवाज नही सुनती सरकार तो इको गार्डन के पास फरियाद करना तो पत्थर से सिर मारने की तरह होगा। प्रदेश सरकार की कर्मचारी विरोधी राजनीति के चलते प्रदेश का छोटा और अल्पवेतन धारी तबका काफी परेशान है। चतुर्थ श्रेणी की भर्ती न करके यह सरकार इस संवर्ग की समाप्ति का कुचक्र रच रही है। अभी तक गांधी प्रतिमा पर धरना देकर अपनी मांगों के प्रति सरकार को जगाने का प्रयास करने वाले कर्मचारियों और पीड़ितों से यह हक भी इस सरकार ने छीन लिया है।उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ के उप महामंत्री सुरेश सिंह यादव ने कहा कि वे शीघ्र ही प्रदेश के अन्य कर्मचारी और राजनैतिक संगठनों को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर एक जुट होकर आन्दोलन कर शहर के मध्य एवं विधानसभा, लोकभवन और एनेक्सी के आसपास धरना स्थल बहाल करने की मांग करने के लिए व्यापक आन्दोलन का आहवान करेगें। उन्होंनें कहा कि अगर हम सरकार चलाने वालों के आसपास खड़े होकर अपनी मांग नही रखगें तो फिर हमारी मांगों पर विचार कैसे होगा। उन्होंने कहा कि धरना प्रदर्शन के दौरान कुछ परेशानी अवश्य होती है लेेकिन व्यवस्था देखने का काम प्रशासन का होता है। प्रशासन अगर व्यवस्था नही देख पाता तो इसकी खमियाजा कर्मचारी या पीड़ित समाज क्यो भोगें।
उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ के उप महामंत्री सुरेश सिंह यादव ने कहा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अपने भावों और विचारों को व्यक्त करने का एक राजनीतिक अधिकार है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति न सिर्फ विचारों का प्रचार-प्रसार कर सकता है, बल्कि किसी भी तरह की सूचना का आदान-प्रदान करने का अधिकार रखता है। संयुक्त राष्ट्र की सार्वभौमिक मानवाधिकारों के घोषणा पत्र में मानवाधिकारों को परिभाषित किया गया है। इसके अनुच्घ्छेद 19 में कहा गया है कि किसी भी व्घ्यक्ति के पास अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार होगा जिसके तहत वह किसी भी तरह के विचारों और सूचनाओं के आदान-प्रदान को स्वतंत्र होगा। उन्होंने कहा कि अभी तक विधानसभा के आसपास धरना देकर पीड़ित व्यक्ति और पीड़ित कर्मचारी और राजनैतिक दल के लोग अपनी आवाज सरकार तक पहुचा लेता था लेकिन जितनी दूर इस धरना स्थल को कर दिया है वहाॅ बैठे पीड़ितों की आवाज कौन सुनेगा। उन्होंने इस सम्बंध में महासंघ की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर धरना स्थल पर पुर्नविचार करने मांग करते हुए विभिन्न कर्मचारी और राजनैतिक संगठनों से इस मामले में एकजुट होकर संघर्ष का आहवान किया है।


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