MY NATION NEWS उ.प्र. चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ वाणिज्यकर, पुनः आन्दोलन को बाध्य न करे प्रशासन: संजय तिवारी
लखनऊ,29 अप्रैल। उत्तर प्रदेशीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ वाणिज्यकर के महामंत्री और महासंघ के उप महामंत्री सुरेश सिंह यादव ने 12 सूत्रीय मांगों के निस्तारण को लेकर 26मार्च से 6 अप्रैल तक आयोजित धरने में शामिल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सूचना एडीशनल कमिश्नर (प्रशासन) द्वारा मांगें जाने पर गहरा आक्रोश जताया है। उन्होंने कहा कि उक्त आन्दोलन चार अप्रैल को इन्ही के हस्ताक्षर से जारी पत्र के आधार पर स्थगित किया गया था। इस पत्र में सभी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार तथा जिले-जोन स्तर पर धरने पर बैठे पदाधिकारियों एवं कर्मचारियां के प्रति कोई प्रतिकूल दृष्टिकोण न अपनाए जाने का लिखित आश्वासन दिया गया था। इसके बाद 27 अप्रैल 2018 को आन्दोलन में शामिल कर्मचारियों की सूचना मांगी जाना इस बाॅत का घोतक है कि वाणिज्यकर के आला अफसर भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों को बचाने के लिए संघ को दबाव में लेने के लिए ऐसा कर रहे है। जिसे कामयाब नही होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर आन्दोलन में शामिल कर्मचारियों का उत्पीड़न हुआ तो आन्दोलन तय माना जाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेशीय चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंध की बैठक में इस मुद्दे को लाया जाएगा। संघ के अध्यक्ष संजय तिवारी और महामंत्री सुरेश सिंह यादव ने आज यहाॅ बताया कि टंकण परीक्षा मंे धांधली, भवन मरम्मत मंद में जारी लाखों की धनराशि की बंदरबाट और अपात्रों द्वारा वाहन के दुरूप्रयोग की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर चार बार होने के बाद जब जाॅच के आदेश हुए तो विभाग के आला अफसर भड़क गए। उस दौरान कर्मचारी संघ के आन्दोलन को आगे बढतें देख तथा महासंघ द्वारा विरोध स्वरूप जारी पत्र के बाद होने वाली स्थिति को समझते हुए कमिश्नर वाणिज्यकर एवं एडीनश्नल कमिश्नर प्रशासन से वार्ता के बाद लिखित आश्वासन एवं आन्दोलन में शामिल कर्मचारियों का किसी प्रकार का उत्पीडन न करने का वायदा कर आन्दोलन स्थगित करा दिया गया था। उन्होंने बताया कि विभाग में पदोन्नति के लिए 14 मार्च को टंकण परीक्षा न लिये जाने एवं 15 मार्च को आए अभ्यर्थियों से टंकण परीक्षा लिये जाने और इसमें व्यापक भ्रष्टाचार की शिकायत की गई थी। इसी प्रकार भवन मरम्मत मद में डिप्टी कमिश्नर अस्थापना वीरेन्द्र नारायण वर्मा द्वारा पहले बिना कार्य 94 लाख रूपये तथा पुनः 98 लाख रूपये के भुगतान की लिखित शिकायत और बिना पात्रता के राजस्व वसूली के लिए वाहन संख्या यूपी-32-1608 का उपयोग करने तथा इस पर प्रतिमाह 35 हजार रूपये खर्च होने और वाहन चालक चतुर्थ श्रेणी से वाहन चालक के पद पर 20 प्रतिशत कोटा है जिसमें 93 पद जबकि 32 में पदोन्नति के सापेक्ष 5 अन्य संवर्ग को पैसे के बल पर पदोन्नत किया गया। इन अनियमिताओं और भ्रष्टाचार की लिखित शिकायत संघ द्वारा कमिश्नर, अपर मुख्य सचिव एवं मुख्यमंत्री पोर्टल पर की जा चुकी है। इसके अलावा संध के प्रतिनिधि मण्डल ने 5 अपै्रल 18 को इन शिकायतों के साथ 12 सूत्रीय मांगों से अपर मुख्य सचिव को अवगत कराया था। आश्वासन के बाद इन गम्भीर शिकायतों पर कार्रवाई तो हुई नही बल्कि आन्दोलन रत कर्मचारी संघ के साथ वादा खिलाफी करते हुए सूचना मांगी गई है। उन्होंने कहा कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के जो भी आरोप है तथ्यात्मक है और जांच का विषय है जिसके कारण विभाग बराबर हमारी आवाज को दबाना चाहता है। उन्होंने कहा कि संघ इस मामले को गम्भीरता से लेकर और जीरो टारलेस भ्रष्टाचार का दावा करने वाली सरकार के वाणिज्यकर मंत्री और मुख्यमंत्री से विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार से अवगत करायेगा।

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