लखनऊ प्रेस कलब में पत्रकारों का कोई हक़ नही।बल्कि प्रेस क्लब क़ब्ज़ा जमाए बैठे चन्द पैसे वालों की जागीर बन चुका है।जी हाँ प्रेस क्लब में अब पत्रकारों को कोई एक गिलास पानी भी जल्दी नही पूछता है आप चाहे जितने बड़े पत्रकार हों।पानी तब मिलेगा जब उन के सधाए हुवे खादिमों को पता हो के ये प्रेस क्लब के मेम्बर हैं। मान्यता प्राप्त पत्रकारों के कार्ड की वो अहमियत नही है इन की नज़र में जिस की जांच पड़ताल सरकार की तरफ से हो कर तब प्रेस कार्ड जारी किया जाता है।बल्कि इन की नज़र में उस कार्ड की वैल्यू है जो इन की यूनियन की तरफ से जारी किया जाता है जिस के लिए पैसे देना पड़ते हैं ।मिम्बर शिप कार्ड मान्यता प्राप्त पत्रकारों का नही बनाया जाता है बल्कि उन लोगों का बनाया जाता है जिन का पत्रकारिता से दूर का भी रिश्ता नही है। मिम्बर शिप कार्ड के लिए प्रेस क्लब में दलाली हो रही है 500 रुपये लेकर भी नही दिया जाता है कार्ड आप को जान कर बड़ी हैरानी होगी लेकिन ये सच है आप को बताता चलूँ के लखनऊ से प्रकाशित होने वाला अखबार गुज़रा ज़माना उर्दू दैनिक के सम्पादक महोदय डाक्टर नसीमुद्दीन नदवी जो के पैरों से माज़ूर हैं उन से 500 रुपये श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के दबंग मेम्बर शहर यार खान ने दिसम्बर में लिये थे लेकिन कार्ड अभी तक नही प्राप्त हुवा 6 माह गुज़र चुके हैं शहेर यार खान श्रमजीवी यूनियन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष श्री हसीब सिद्दीक़ी के बड़े क़रीबी माने जाते हैं ज़ियादा तर शहेर यार खान प्रेस क्लब में हसीब सिद्दीक़ी के दफ्तर में बैठे देखे गए हैं अब इस तरह के गोरख धन्धे में कौन कौन शामिल है ये अभी कहा नही जा सकता है लेकिन ये ज़रूर साबित हो रहा है के लखनऊ प्रेस क्लब अब चन्द लोगो की जागीर बन चुका है ।काश वो दिन जल्द आए जब हर पत्रकार को पानी तो कम से कम मिलने लगे ये ना देखा जाए के ये हमारा है या पराया ।हसीब सिद्दीकी साहब आप तो ऐ सी कमरे में बैठे रहते हैं ज़रा हालात का जायज़ा भी लीजिये नही कुर्सी पिछवाड़े से निकलने का इमकान है आप के करीबी ने तो मुझे ये भी बताया है के आप मधु शाला से भी बड़ी मोहब्बत रखते हैं रमज़ान में भी गुरेज़ नही करते हैं खैर ये आप का ज़ाती मामला है मुझे इससे कोई गरज़ नही ।।।।
पेश हैं माई नेशन टीम की ख़ास रिपोर्ट अशोक सिंह विद्रोही /कर्मवीर त्रिपाठी/ सुधीर वर्मा की कलम से उत्तर प्रदेश - यह लोकतंत्र है साहब यहाॅ मुर्दे जिन्दा हैं।ये डिजिटल इंडिया के जिंदा मुर्दे अपने जैसे मुर्दो से ही नहीं अपितु देश के गृह मन्त्री प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भी समय - समय पर मिलते रहे हैं ।यह तथ्यहीन नहीं कह रहा हूं प्रमाण हैं। इस लोकतंत्र में आप और हम कब तक जीवित रहेगें? इसका लेखा-जोखा यमराज व महाकाल के इतर सरकार के राजस्व विभाग के पास ही है। राजस्व विभाग की असीम कृपा से देश भर में हजारों की संख्या में जीवित मुर्दे हो गये हैं। कहने का मतलब है कि इस लोकतंत्र में जीवित मुर्दो की तादात में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गयी है ।जिसके चलते इसी विभाग की कृपा से वर्षो पूर्व एक संगठन "मृतक संघ " खड़ा हुआ है। इसी मृतक संघ के अध्यक्ष मृतक लाल बिहारी हैं। मृतक ...
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